Wednesday, February 19, 2020

Holi Festival 2020

Holi Festival 2020 in India & world. 


holi in 2020
HOLI 2020

Holi Festival 2020 is celebrated with great pomp not only in India but all over the world.


महाशिवरात्रि पर्व के बाद होली का त्यौहार (Holi Festival) फाल्गुन मास की पूर्णिमा को भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली एक धार्मिक एवं सामिजिक पर्व के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के रंगों का त्यौहार है। इस पर्व को सभी वर्गों के लोग आपस बिना किसी भेदभाव के बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। होली वाले दिन होली पूजन (Holi Festival Worship) के बाद शाम को होली का दहन किया जाता है।

गॉवों और कस्बों में होली (Holi Festival)के पन्द्रह दिन पूर्व ही होली का दहन करने के लिए गुलरियाँ, ढ़ाल, चूल्हा, झुनझुना आदि वस्तुएँ/खिलौने गोबर से बनाना आरम्भ हो जाता है। इन्हें बनाते समय बीच में छेद कर दिया जाता है। सूखने के बाद इनको पतली रस्सी में पिरोकर मालाएँ बनाई जाती है। होलिका दहन को खुले स्थान दो तीन पहले मोटे-मोट लक्कड, कण्डे एवं गोबर की मालाओं को रख दिया जाता है।

when is holi in 2020
होली के दिन सुबह के समय की पूजा करने का विधि-विधान


होली का त्यौहार वर्ष 2020 (Holi Festival, 2020) में 9 फरवरी को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जायेगा। होली के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले हनुमानजी, भैरोंजी आदि देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद उन पर जल, रोली, माला चावल, फूल, गुलाल, चंदन, नारियल आदि के साथ दीपक से आरती करके दंडवत करें। फिर सबके रोली से तिकल लगा दें और जिन देवताओं को आप मानते हों उनकी पूजा करें। फिर थोड़े से तेल को सब बच्चों के हाथ लगाकर किसी चौराहे पर भैरों के नाम से एक ईट रखकर उस पर चढ़ा दें।

इस दिन अच्छा भोजन, मिठाई, नमकीन आदि पकवान तैयार कर थोड़ा-थोड़ा सभी सामान एक थाली में देवताओं के नाम का निकालकर ब्राह्मणी को दें। भगवान का भोग लगाने पश्चात् ही स्वयं भोजन करना चाहिए।

Holi Festival, Holika dahan 2020
होली के दिन सांय के समय पूजन विधि एवं सामग्री- 


पहले जमीन पर थोड़े गोबर और जल से चौका लगायें, चौका लगाने के बाद एक सीधी लकड़ी (डंडा) के चारों तरफ गूलरी की माला लगाये। उन मालाओं के आसपास गोबर की ढ़ाल, तलवार, खिलौने आदि रखें। जो पूजन का समय नियत हो, उस समय जल, मोली, रोली, चावल, फूल, गुलाल, गुड़ आदि से पूजन करें। चार गूलरी की माला अपने घर में पितरों, हनुमानजी, शीतलामाता तथा घर के नाम की उठाकर अलग रखकर यदि आपके यहां घर में होली न जलती हो, तो एक माला, पूजा की समस्त सामग्री, कच्चे सूत की कुकड़ी, जल का लोटा नारियल आदि सामान गांव या शहर की होली, जिस स्थान पर जलती हो वहाँ ले जायें। वहाँ जाकर होली का पूजन करें। गूलरी की माला, नारियल आदि को चढ़ाकर परिक्रमा देनी चाहिए। होली में हरे गेहूँ, जौ की बाल अथवा हरे चने को भून कर सभी को प्रसाद के रूप में बांटकर खा लें।

यदि घर में होली का दहन करें, तो गांव अथवा शहर की होली में से अग्नि लाकर होली का दहन करें। घर की होली में अग्नि लगते ही उस डंडा या लकड़ी को बाहर निकाल लें, क्यांकि इस लकड़ी को भक्त प्रहलाद का रूप मानते हैं। स्त्रियाँ होली जलते ही एक घंटी से सात बार जल का अर्घ्य देकर रोली चावल चढ़ावें और होली की सात परिक्रमा लगायें। फिर होली के गीतों आदि का गायन करेंं। पुरुष घर में जौ एवं गेहूँ की बाल आदि को भूनकर सभी को प्रसाद के रूप में बाँट दें। होली पूजन के बाद बच्चे तथा पुरुष रोली से तिलक लगावें। 

किसी भी पर्व अथवा त्यौहार को मनाने के पीछे कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य होती है। इसी प्रकार होली  (Holi Festival) की एक पौराणिक कथा है-

इस पर्व /त्यौहार का सम्बन्ध भक्त प्रह्लाद से है। भारत में एक असुर जाति का हिरण्यकश्यप नाम का राजा राज्य करता था, उसके पुत्र का नाम प्रह्लाद था। प्रह्लाद बचपन से ही भगवान का परम भक्त था, परन्तु उसका पिता भगवान को अपना शत्रु मानता था, इस कारण हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अनेक उपाय किये, पर वह उसे मार न सका। हिरण्यकश्यप की बहन, जिसका नाम होलिका था, को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यप ने लकड़ियों के ढेर में आग लगवाई और प्रहलाद को होलिका की गोद में देकर अग्नि में एक अग्नि नाशक चादर ओढ़कर प्रवेश करने की अज्ञा दी। होलिका ने अग्नि में प्रवेश किया, परन्तु भगवान की कृपा से होलिका के ऊपर से वह अग्नि नाशक चादर  भगवान के भक्त प्रह्लाद के ऊपर आ गई इस प्रकार भक्त प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तभी से होलिका दहन करने की प्रथा आरम्भ हुई है।

Dhuleti 2020/dhulandi 2020
होली के बाद धूलैंडा या धूलिका पर्व -

Holi Festival 2020
Dhulandi 2020

चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा अर्थात् होली से अगले दिन धूलिका त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन होली की अवशिष्ट राख की वंदना की जाती है। उस राख को मस्तक पर लगाते हैं और एक-दूसरे से गले मिलते हैं। इस दिन एक दूसरे के विना किसी भेदभाव के रंग, गुलाल, आदि लगाकर आपस में सुखमय जीवन की शुभकामनाएँ देते हैं। धार्मिक स्थलों पर रंग, गुलाल के साथ-साथ फूलों की होली खेली जाती है

मथुरा-वृन्दावन में विभिन्न प्रकार से होली खेली जाती हैजैसे बरसाना में लट्ठमार होली तथा श्री बॉके बिहारी मन्दिर, वृन्दावन में फूलों की होली खेली जाती है।

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