Monday, January 20, 2020

hindi kahaniya (अकबर और बीरबल)

hindi kahaniya (अकबर और बीरबल)

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Hindi Kahaniyan


hindi kahaniya (व्यवहारिक ऑखों का नजरिया)

शहंशाह अकबर और बीरबल के बारे में आप सभी जानते हैं। आईये उस समय इन दोनों की नौकझोंक के बारे में एक नया किस्सा पढ़ते हैं।

hindi kahaniya - अकबर और बीरबल

शहंशाह अकबर को प्रातः बगीचे एवं नदी के किनारे घूमना बहुत अच्छा लगता था। नदी की सैर में नदी के बदलते हुये रूपों को देखकर उनका मन प्रसन्न हो जाता था। एक दिन वर्षा ऋतु में अपने दरबारियों के साथ नदी के किनारे सैर पर निकले। जब वे नदी के किनारे पहुँचे, तो वर्षा होना प्ररम्भ हो गई। अकबर ने बहती हुई नदी में उतार-चढ़ाव वाली तेज लहरों को देखकर कहा कि- आज नदी का मिजाज कुछ ठीक नहीं लगता?

यह सुनकर बीरबल बोला- जी शहंशाह। जैसे कि आप रहम दिल के हैं, आपके दिल में सभी के लिए जगह है, लेकिन कभी-कभी आपको क्रोध आ जाता है, तो आग का गोला बन जाते है। 

hindi kahaniya - अकबर और बीरबल

बादशाह बोला- बीरबल मैं कुछ समझा नहीं।

बीरबल बोला- मेरा कहने का तात्पर्य है कि कभी-कभी हम लोग साक्षात्कार दिखने वाली वस्तु को भी देख नहीं पाते हैं। भगवान ने हमें आँखें दी हैं, फिर भी हम अन्धे बन जाते हैं।

इस बात का फायदा बीरबल के एक बिरोधी दरबारी ने उठाया और बादशाह से बोला-

शहंशाह देखा बीरबल हम लोगों को एवं आपको अन्धा कह रहा है।

यह बात सुनकर बादशाह आग-बबूला हो गये और बोले- बीरबल तुम्हारा मतलब है- कि मैं कभी-कभी अन्धा हो जाता हूँ, तुम एक सप्ताह में साबित करो, नहीं तो तुम्हें कराबास का दण्ड भुगतने के लिये तैयार हो जाओ।
बीरबल ने बादशाह को समझाने की कोशिश की, मगर बादशाह अपने क्रोध के कारण समझने की कोशिश नहीं की।

hindi kahaniya- अभ्यास का महत्त्व  

बादशाह का अपने महल पहुँचने के कुछ समय बाद क्रोध शान्त हो गया। और उसने बीरबल को बुलाया, लेकिन बीरबल छः दिन तक बादशाह के दरबार में नहीं आये।

आखिरी दिन प्रातः काल बीरबल एक तालाब के पास बदरगद के पेड़ की छाया में चारपाई बुनने लग गये थे।
उस तालाब पर एक दरबारी घोडे पर सवार होकर स्नान करने आया, उसने अपना घोडा एक पत्थर से बाँधा। और स्नान करने लिये तालाब की तरफ गये, तो उसने पेड़ की नीचे बीरबल को चारपाई बुनते देखकर हक्का-बक्का रह गया। वह बीरबल के पास गया, और बोला- बीरबल जी, यह क्या कर रहे हैं?

बीरबल ने उसकी तरफ देखा और मुस्कराकर अपने पैड़ पर कुछ लिखकर अपने कार्य में लग गये। दरबारी ने काफी कोशिश की, कि बीरबल कुछ जबाब दे, लेकिन उन्होंने कुछ उत्तर नहीं दिया।

कुछ समय बाद दरबारी दरबार में पहुँचा और उसने बादशाह एवं वहाँ मौजूद अन्य दरबारियों से कहा- कि बीरबल तालाब के पास चारपाई बुन रहा है।

दरबारी की बात सुनकर बादशाह ने उसकी बात विश्वास नहीं किया, लेकिन दरबारी अपनी बात पर अड़िग रहा। और बोला- शहंशाह आप स्वयं चल कर देख लीजिए।

बादशाह ने अपने दरबारियों के साथ तालाब पर जाने का निर्णय लिया। तालाब पर पहुँचे, तो देखा- कि बीरबल चारपाई बुन रहा था।

बादशाह ने अपने दरबारी को आदेश दिया, कि बरगद के पेड़ के पास जाकर देखिये कि बीरबल यह क्या कर रहा है?

दरबारी बीरबल के पास पहुँचा और बोला-बीरबल जी यह क्या कर रहे हैं? 

बीरबल ने उस दरबारी के तरफ मुस्कराकर अपने पैड़ पर कुछ लिखकर फिर अपने कार्य में लग गये। 
बादशाह ने अन्य दरबारियों को बीरबल के पास भेजा- उन्होंने भी यही कहा- कि बीरबल जी यह क्या रहे हैं? 
लेकिन उत्तर में कुछ मिला और उसने अपने पैड़ पर कुछ लिखा।

अन्त में बादशाह ने बीरबल के पास जाने का निश्चय किया-
बादशाह बीरबल के पास पहुँचे और बोले- बीरबल यह क्या रहे हो?

hindi kahaniya - अकबर और बीरबल

बीरबल ने हाथ जोड़कर बादशाह के सामने अपना सिर झुकाया और अपने पैड़ पर कुछ लिख दिया।
बादशाह बोले यह क्या लिख रहे हो?
बीरबल बोला- शहंशाह मैं ऐसे लोगों की सूची बना रहा हूँ, जिनकी आँखें तो हैं, लेकिन अपने स्वभाविक रूप से व्यवहार ऐसा करते हैं, कि मानो उनकी आँखें नहीं है।

बीरबल ने पैड़ बादशाह की तरफ बढ़ाया, तो अन्धों की लिस्ट में अपना नाम देखकर बादशाह आग-बबूल हो गया। लेकिन बादशाह ने अपना गुस्सा जल्दी ही काबू कर लिया।

जब बीरबल बोला-शहंशाह! मैंने पिछले हफ्ते आपसे कहा था कि हम लोग कभी-कभी अन्धे हो जाते हैं। यही बात सिद्ध करने के लिए मैं यहाँ चारपाई बुन रहा हूँ। आशा करता हूँ कि आप मेरा दण्ड माफ कर देंगे।


बीरबल की बातें सुनकर बादशाह बोले- ठीक कहते हो तुम और जोर से हँस पड़े।

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