Monday, January 6, 2020

hindi kahaaniya (अकबर और बीरबल)

हिन्दी कहानी-अकबर और बीरबल

एक दिन अकबर अपना दोपहर का भोजन कर रहा था और बीरबल उसके पास खड़ा हुआ था। मेज पर बहुत सारी सब्जियाँ रखी थीं। अकबर ने उन सबको चखा। उसे बैंगन की रसेदार सब्जी पसन्द नहीं आती मालूम पड़ रही थी।
उसने बीरबल से पूछा, क्या तुमको बैंगन की रसेदार सब्जी पसन्द है?
बीरबल एक चतुर आदमी था। उसने अकबर के चेहरे की ओर देखा और जान गया कि बादशाह ने इसे पसन्द नहीं किया है। इसलिए उसने कहा, जहाँपनाह इसको कोई पसन्द नहीं करता है।
कौन इसे पसन्द करेगा? यह खाने में बहुत खराब लगती है।
बादशाह मान गया और बोला- हाँ तुम ठीक कहते हो। यह बुरी दिखाई पड़ रही है, यह खाने में बहुत बुरी लग रही है और बुरी गंद दे रही है। बीरबल को साहस मिल रहा था।
उसने कहा श्रीमान् जी आप देख रहे हैं कि इसको हिन्दी में बेगुन कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोई गुन नहीं होता है।
बादशाह ने पूछा- गुन का क्या अर्थ है?
बीरबल ने जवाब दिया कि इसका अर्थ होता है- श्रीमान् यह केवल गधों के खाने के लिए उपयुक्त है।

लगभग एक माह बाद जब अकबर अपना कर रहा था, तब बीरबल वहीं था। बहुत-सी जायकेदार सब्जियाँ थीं। उनमें से एक बैंगन की रसेदार सब्जी भी थी। मगर वह अच्छी तरह पकायी गयी थी और जायकेदार लग रही थी। बादशाह उसका मजा ले रहा था। अचानक उसने टिप्पणी की- बैंगन आश्चर्यजनक सब्जी होती है।
बीरबल बादशाह का मिजाज फौरन समझ गया। उसने कहा-श्रीमान् जी यह संसार की सबसे उत्तम सब्जी है। यह सब्जियों का राजा है।
शहंशाह ने कहा, तुम यह कैसे कह सकते हो?
बीरबल ने जवाब दिया- यह इसलिए कि इसके सिर पर ताज होता है।
अकबर ने कहा-लेकिन मैं समझता हूँ कि यह केवल गधों के खाने के लिए उपयुक्त है।
बीरबल नीचे झुक गया और बोला- श्रीमान् जी मै। मानता हूँ। तभी गधे इसको पसन्द करते हैं।  

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