Tuesday, November 26, 2019

Indus Valley of Civilization (सिन्धु घाटी सभ्यता)

Indus Valley of Civilization


भारतवर्ष का इतिहास तो मानव सभ्यता के प्राचीन पाषाण युग के साथ ही प्रारम्भ हो जाता है, लेकिन देश की सुविकसित सभ्यता एवं संस्कृति का इतिहास वैदिक सभ्यता से भी प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता से ही प्रारम्भ होता है। इस सभ्यता के अधिकतर साक्ष्य सिन्धु तथा उसकी सहायक नदियों की घाटियों के किनारे उपलब्ध हुये। इसलिये इसे  ''सिन्धु घाटी की सभ्यता'' के नाम से पुकारा जाता है। इसे हडप्पा संस्कृति (Culture of Hadappa)  के नाम से भी पुकारा जाता है, क्योंकि हडप्पा नगर और उसके आस-पास का क्षेत्र इस सभ्यता का केन्द्र बिन्दु रहा था।

Indus Valley Civilization:

इस सभ्यता की खुदाई का कार्य सर्वप्रथम 1920 ई. में हडप्पा नगर में शुरु किया गया था, जिसका नेतृत्व श्री दायाराम साहनी तथा श्री माधोस्वरूप वत्स ने किया था। हड़प्पा पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) के माण्टगोमरी जिले में लाहौर से लगभग 100 मील दूर रावी नदी के तट पर स्थित है। यहाँ की खुदाई में एक भव्य नगर के भग्नावशेष मिले थे। इसके बाद 1922 ई. में श्री राखलदास बनर्जी के नेतृत्व में सिन्धु प्रान्त(पाकिस्तान) के लरकाना जिले में खुदाई का कार्य किया गया, जिसके परिणास्वरूप मोहनजोदड़ो के भव्य नगर के अवशेष मिले थे।
Indus Valley Civilization ( सिन्धु घाटी सभ्यता
प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता

यद्यपि उक्त दोनों स्थानों में लगभग 350 मील का अन्तर था, किन्तु दोनों स्थानों की खुदाई में उपलब्ध अवशेषों में बेजोड़ सभ्यता थी। इस प्रकार विभिन्न पुरातत्ववेत्ताओं ने इस सभ्यता की खुदाई के कार्य को आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप यह ज्ञात हुआ कि यह सभ्यता केवल सिन्धु घाटी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पंजाब, राजस्थान, बलूचिस्तान से भी इस सभ्यता से सम्बन्ध रखने वाले अवशेष प्राप्त हुये थे।
भारत की स्वतंत्रता के बाद वृह्दस्तर पर खुदाई का कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों के बहुत से स्थानों पर हड़प्पा सभ्यता के भी अवशेष प्राप्त हुये हैं। 

Indus Valley Civilization:

सभ्यता के विस्तार क्षेत्र (Extension Area of Civilization) के बारे में पुरातात्त्विक खोजों से यह सिद्ध किया कि इस सभ्यता का विस्तार अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, सिन्धु, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान, गुजरात एवं उत्तरी भारत में गंगा घाटी तक व्याप्त था।  

सभ्यता का काल (Era of Civilization) सिन्धु सभ्यता के काल के बारे में पुरातत्ववेत्ताओं में भारी मतभेद है। बुलीहॉल, गार्डन चाइल्ड आदि विश्व की नदी-घाटी सभ्यताओं में सुन्धु सभ्यता को सबसे प्राचीन एवं प्रारम्भिक मानते हैं। जॉन मार्शल और डॉ0 राधकुमुद मुखर्जी के अनुसार सिन्धु सभ्यता का प्रारम्भ 3250 ई.पू. से पहले माना है।

डॉ. राजवली पाण्डेय के अनुसार ''यहाँ की खुदाई में जल के धरातल तक प्राचीन नगरों के खण्डहरों के एक के ऊपर दूसरे सात स्तर मिले हैं। मोटे तौर पर यदि एक नगर के बसने और उजड़ने के लिये 500 वर्ष का समय दिया जाये, तो सात नगरों के बसने और उजड़ने में लगभग 3500 वर्ष लगे होंगे। सबसे नीचे का स्तर भी सभ्य नगर का अवशेष है, जिसके पूर्व सभ्यता विकसित हो चुकी थी और यदि भूगर्भ का पानी बीच में बाधा न डालता तो सातवें स्तर के नीचे भी खण्डहरों के स्तर मिल सकते हैं। इस प्रकार सिन्धु सभ्यता कम से कम ईसा पूर्व चार हजार वर्ष की है।''

Indus Valley Civilization:

सभ्यता का निर्माता (Creator of Civilization) सिन्धु सभ्यता के निर्माता कौन थे। इसके बारे में काफी मतभेद है। यद्यपि विद्धानों की तीन मान्यताएँ प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार लोग मिश्रित जाति के थे। दूसरी मान्यता के अनुसार लोग द्रविड थे और तीन मान्यता के अनुसार वे लोग आर्य थे।

पहली मान्यता के  विद्वान कर्नल स्युअल और डॉ. गुहा का कहना है कि सिन्धु सभ्यता का निर्माण किसी एक नस्ल अथवा जाति के लोगों ने नहीं किया। सिन्धु सभ्यता नागरीय सभ्यता थी। इसके मुख्य नगर व्यापार-वाणिज्य के प्रमुख केन्द्र बने हुए थे। अतः आजीविका की तलाश में अनेक प्रजातियों के लोग यहाँ आकर बस गये थे।

दूसरी मान्यता के विद्वानों का कहना कि खुदाई में प्राप्त नर कंकालों में भूमध्य सागरीय नस्ल की प्रधानता है, अतः इस सभ्यता के निर्माण का श्रेय द्रविडों को था। द्रविड़ लोग भूमध्य सागरीय नस्ल की ही एक शाखा थे। कुछ का मत है कि बलूचिस्तान आदि भागों में बोली जाने वाली ’ब्राहुई’ भाषा तथा द्रविड़ों की भाषा में समानता के कारण भी द्रविड़ों को इस सभ्यता का निर्माता मानते हैं।

तीसरी मान्यता के विद्वानों के अनुसार इस सभ्यता के निर्माता आर्य थे अथवा आर्यों ने भी इसके विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान अवश्य दिया होगा।

डॉ. पुसालकर ने कहा है कि ''यह आर्य और अनार्य सभ्यताओं के मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती है। अधिक से अधिक हम यह कह सकते हैं कि सम्भवतः उस समय में ऋग्वैदिक आर्य वहाँ की जनता का एक महत्त्वपूर्ण भाग थे और उन्होंने भी सिन्धु घाटी की सभ्यता के विकास में अपना योगदान दिया।''

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धन्यवाद् दोस्तों अगले अंकों में सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई के प्राप्त साक्ष्य/अवशेषों  के अनुसार कुछ नया सीखने का प्रयास करेंगे। 

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