Wednesday, November 27, 2019

Indus Valley of Civilization (सिन्धु सभ्यता के नगर एवं भवन निर्माण )

Indus Valley of Civilization- City and Building Construction

पिछले अंक में हमने सिन्धु सभ्यता के विस्तार क्षेत्र एवं सभ्यता के काल के बारे में प्रकाश डाला था। आइए दोस्तों इस अंक में हम सिन्धु सभ्यता के नगर भवन-निर्माण के बारे में अध्ययन करेंगे कि उस समय भवन-निर्माण की कला कैसी थी? 

Indus Valley of Civilization- City and Building Construction 

 सिन्धु सभ्यता के प्रमुख केन्द्रों में जो खुदाई हुई थी, उससे पता चला कि इन नगरों की रचना एक योजनाबद्ध तरीके के अनुसार की गई थी। इन नगरों के स्थापत्य शिल्प और उनकी आधार योजना में समानता व उच्च कोटि की व्यवस्था देखकर यही लगता है कि सिन्धुवासी अपने नगरों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से करते थे और योजना बनाने वाले तथा रचना करने वाले इंजीनियर लोग नगर-रचना-शास्त्र के अनुभवी ज्ञात रहे होंगे।
https://hindiedinfo.blogspot.com/2019/11/city-and-building-construction-of-indus.html
सिन्धु सभ्यता के नगर एवं भवन निर्माण

Indus Valley of Civilization- City and Building Construction 

सिन्धु सभ्यता के नगर नदियों के मुहाने पर बसाये गये थे। हडप्पा, रावी तथा मोहनजोदडो, सिन्धु नदी के किनारे स्थित है। इन नदियों से नगर की सुरक्षा करने के लिये बांधो का निर्माण भी किया जाता था, उनके योजनाबद्ध नगर निर्माण की आधार-पीठिका नगरों की प्रमुख सड़कें थी। ये सडकें पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर सीधी समानान्तर जाती थीं और एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जहाँ चौराहे बने होते थे। नगर की मुख्य सडकें काफी चौडी होती थी। ऐसा प्रतीत होता है कि मोहनजोदडो की मुख्य सडकें तैतीस फीट चौडी थी। सडक की इतनी अधिक चौडाई इस बात को इंगित करती है कि उस समय भी यातायात काफी रहा होगा। सहायक सडकें नौ फीट से अठारह फीट तक चौडी थीं। सडकों को मिलाने वाली गलियाँ भी काफी चौडी थीं। सभी सड़कें मिट्टी की बनी हुई थीं। केवल मुख्य सडकों पर इस बात के चिन्ह पाये गये हैं कि उसे ईटों के टुकडों से पक्का करने का प्रयत्न किया गया होगा। मिट्टी की सड़कें होने कारण भी सड़कों की सफाई का बडा ध्यान रखा जाता था। सडकों पर स्थान-स्थान पर कूडा-करकट के लिये मिट्टी के पात्र रखे जाते थे या फिर सडकों के किनारे जगह-जगह  पर गढ्ढे खोदे जाते थे। इससे पता चलता है कि यहाँं के लोग अपने नगरों की साफ-सफाई एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते थे।
https://hindiedinfo.blogspot.com/2019/11/city-and-building-construction-of-indus.html
नगर निर्माण

Indus Valley of Civilization- City and Building Construction 

नगर निर्माण की पूर्व योजना का संकेत नगर के गन्दे पानी को शहर से बाहर दूर ले जाने की व्यवस्था से भी मिलता है। सिन्धु घाटी के अक्सर सभी नगरों में नालियों का जाल बिछा हुआ था। मकानों से आने वाली नालियाँ गली की नालियों से मिल जाती थीं और गली की नालियाँ सहायक सडकों की नालियों से मिल जाती थीं और सहायक सडकों की नालियाँ मुख्य मार्गों की बडी नालियों से मिल जाती थीं। इस प्रकार घरों, गलियों और सडकों का गन्दा पानी नगर के बाहर निकाल दिया जाता था। नालियाँ पक्की होती थीं और उनके निर्माण में ईंटों, पत्थरों, चूने तथा जिप्सम का प्रयोग किया जाता था। नालियों को ईटों तथा पत्थर की पट्टियों से पाट दिया जाता था। समय-समय पर नालियों को साफ भी किया जाता था। इन नालियों में थोडी दूर पर शोषक-कूप भी बनाये गये थे, ताकि कूडे से पानी का बहाव रुक न सके। नालियों की ऐसी उत्तम व्यवस्था यूरोप के प्रमुख नगरों में भी 18वीं शताब्दी के आसपास की विकसित हो पाई थी। 

Indus Valley of Civilization- City and Building Construction 

मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई से सिन्धुवासियों की भवन-निर्माण कला के बारे में भी काफी कुछ जानकारी मिलती है। इन नगरों के मकानों की एक विशेषता यह थी कि उनके दरवाजे या खिड़कियाँ मुख्य मार्ग की ओर नहीं खुलती थीं, अपितु गलियों और सहायक सड़कों की ओर खुलती थीं। भवन निर्माण करने हेतु ईटों को पकाने के लिये लकड़ी का प्रयोग करते थे। शायद शहर के बाहर ईंटों को पकाने हेतु भट्टे रहे होंगे। दीवारों में ईंट जोड़ने के लिये मिट्टी का गारा प्रयोग में लाया जाता था। मकानों का निर्माण नींव डालकर किया जाता था। पहली मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाने हेतु सीढ़ियाँ लकड़ी अथवा पत्थर की बनाई जाती थीं। अधिकतर मकानों के दरवाजे तीन या चार फुट चौड़े होते थे। कमरों में दीवारों के साथ आलमारियाँ बनाने की प्रथा थी। मकानों के बीच में आंगन बनाया जाता था। आंगन के एक कोने में रसोईघर होता था। प्रवेशद्वार के पास वाले कोने में स्नानागार तथा शौचालय भी होते थे। प्रत्येक मकान में पानी के लिये पक्की ईंटों का एक कुआ भी बनाया जाता था। सिन्धु सभ्यता की खुदाई के समय यह भी साक्ष्य प्राप्त हुये हैं कि नगरों और गलियों के दोनों ओर दुकानों का निर्माण किया जाता था। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उस समय भवन निर्माण की शिल्पकला काफी उन्नतशील रही होगी

0 comments:

Post a Comment

Please do not enter and spam link in the comment box.